मेरी नज़र में

शनिवार, 26 दिसंबर 2015

प्यार से प्यार तक

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  प्यार से प्यार तक

 साउथ दिल्ली के तैमूरनगर का इलाक़ा गुरुद्वारे के पीछे छोटी सी कालोनी जहां हर किसी के अपने-अपने सपने अपनी जरूरतें...जहां हर कोई अपना कल संवारने में शिद्दत से मशग़ूल था....उसी भागमभाग और मशगूलियत के बीच में दो दिल जवान हो रहे थे...संजना और मुकुल, दोनों के परिवार ख़ुशहाल थे...मुकुल के पिता जी की तैमूरनगर गुरुद्वारे के पास ही एक दूकान थी और माता जी घर संभालती थी...वहीं संजना की मम्मी पास के ही भरतनगर के सरकारी हाईस्कूल में टीचर थीं...संजना की मम्मी का तलाक़ हो चुका था सो घर में संजना और उसकी मम्मी थी...
संजना और मुकुल आठवीं में पढ़ रहे थे दोनों नादान चंचल हसीन दुनिया से बेफिक्र...संजना और मुकुल का घर भी आस पास में ही था सो दोनों स्कूल के बाद भी ज्यादा वक्त साथ में ही गुजारते थे...एसा एक भी दिन नहीं होता था जब वो दोनों नहीं मिलते थे...साथ में खेलना कूदना आस-पास में खेलना कूदना घूमना फिरना...ये दोनों एक दूसरे के लिए अपने दिल में पनप रहे प्यार से बिल्कुल अनजान थे....इसी अनजाने में दोनों एक दूसरे के साथ वक्त बिताते गए...समय बढ़ता रहा दोनों की समझ भी बढ़ती रही...दोनों दसवीं क्लास में पहुंच गए...बोर्ड के इग्ज़ाम का प्रेशर था दोनों पर...एक दिन दोनों ने डिसाईड किया कि हम साथ में इग्ज़ाम की तैयारी करेंगे जिससे हम दोनों एक दूसरे की मदद कर सकेंगे....दोनों अब उम्र के उस पड़ाव पर थे  जहां एक लड़का एक लड़की की तरफ और एक लड़की एक लड़के की तरफ सबसे ज्यादा आकर्षित होते हैं...एसा ही कुछ अब इन दोनों के साथ भी होने लगा था...पढ़ाई करते करते या फिर खेलने के दौरान अगर एक दूसरे से टच हो जाते तो दोनों का शरीर सीहम जाता और फिर जल्दी से दूरी बना लेते...मुकुल कुछ ज्यादा ही संजना की तरफ खींचा जा रहा था...वो संजना के बारे मेंं सोचना भी शुरु दिया था...मुकुल चुपके चुपके संजना की आंखों को बालों को कमर को मासूम सी प्यारी नज़रो से नीहारता रहता...लेकिन वो संजना को इस बात का अहसास भी नहीं होने दे रहा था... वक्त का कांटा आगे बढ़ता रहा दोनों ने अच्छे से दसवीं कम्पलीट कर ली...अब दोनों ने 11वीं में एडमीशन करा लिया...वक्त के साथ साथ संजना और भी खूबसूरत होती जा रही थी और वहीं मुकुल इश्क में पूरी तरह संजना का आशिक हो चुका था...अब मुकुल के दोस्त भी संजना के हूसन की तारीफ करने लगे थे...जिसके कारण मुकुल कुछ असुरक्षित महसूस करने लगा था उसे लगने लगा अगर वो संजना को अगर अपनी बात नहीं बताता है तो कहीं कोई और ना उससे उसकी संजना को छीन कर ले जाए... और फिर एक दिन..मुकुल ने अपने दिल की बात संजना से कर दी ...संजना भी जवान हो चुकी थी उसके दिल में भी कुछ उमंगे थी उसके भी अपने कुछ सपने और ख्वाहिशें थी...साथ ही मुकुल ही एक एसा वाहिद लड़का था जिसको वो बचपन से जानती थी उसको संजना कैसे मना कर सकती थी...संजना ने थोड़ा टाईम लेकर मुकुल को हां कर दिया...इसके बाद दोनों और भी करीब आ गए...ज्यादा से ज्यादा वक्त साथ गुजारने लगे...दोनों अब बहुत करीब आ चुके थे बहुत करीब...वक्त का पहिया तेजी से आगे भागता गया और वक्त से साथ साथ ये दोनों भी...दोनों की पढ़ाई भी खत्म हो चुकी थी...मुकुल पर अब संजना शादी का प्रेशर बनाने लगी...मुकुल भी संजना से शादी करना चाह रहा था लेकिन अभी तक मुकुल की जॉब नहीं लगी थी...सो मुकुल को अभी थोड़ा वक्त चाहिए था...संजना भी चाहती थी कि पहले मुकुल की जॉब हो जाए फिर शादी करेंगे....एक सुबह जब संजना सो कर उठी तो उसकी तबीयत कुछ ठीक नहीं लग रही था...संजना को उल्टी शुरु हो गई...संजना को शक हुआ उसने सेल्फ प्रेगेनेंसी टेस्ट किया और टेस्ट पोजेटिव आया संजना बूरी तरह डर गई...ये बात बताने के लिए संजना ने मुकुल को कॉल किया लेकिन मुकुल कॉल नहीं पिक कर रहा था...संजना अपने आपको रोक नहीं पाई ये बात बताने के लिए संजना मुकुल के घर पहुंच गई...मुकुल घर पर नहीं था...उसकी मम्मी से संजना इधर उधर की बातें करने लगी...उतने में किसी ने दरवाजा नॉक किया मुकुल की मां ने दरवाजा खोला सामने पुलिस खड़ी थी....पुलिस को देख कर मुकुल की मां घबरा गई तभी पिछे से संजना भी आ गई....इंस्पेक्टर ने मुकुल के बारे में बताया कि मुकुल की गोली लगने से मौत हो गई है...ये सुनकर मुकुल की मम्मी और संजना दोनों पत्थर की मुर्ति की तरह सुन्न हो गई...बाद में पुलिस से पता चलता है कि मुकुल कम समय में ज्यादा पैसा कमाने के लिए ड्रग्स का सप्लायर बन गया था...दूसरे गैंग वालों ने मुकुल को बदरपुर इलाके में मौका मिलते ही गोली मार दी जिससे उसकी मौत हो गई...
संजना बुरी तरह टूटी हुई और बेबस महसूस कर रही थी...एक तरफ उसका प्यार उससे बहुत दूर जा चुका था दूसरी तरफ उसके प्यार की निशानी उसके पेट में पल रहा था...एसे नाजुक हालात में संजना की मां ने संजना का भरपुर साथ दिया..जिससे संजना के अंदर हिम्मत आई और उसने अपने पहले प्यार की निशानी को जन्म दिया...संजना ने उसका नाम भी मुकुल रखा....जिसके सहारे वो अपनी जिंदगी बिताने लगी...मुकुल जैसे जैसे बड़ा होता रहा था संजना को अपने बचपन की हर वो यादें ताजा होती जा रही थीं जो उसने मुकुल के साथ बिताया था..इसी के सहारे संजना अपनी जिंदगी जीती गई...कुछ खूबसूरत यादों के सहारे...
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